श्रीकृष्ण के आचरण को हम अपने जीवन में उतार कर अपने जीवन को सार्थक करें-:स्वामी गोपालाचार्य

भागलपुर/ सबौर:-श्रीमद् भागवत कथा केवल कथा मात्र नहीं है। श्रीकृष्ण की कथा असल में संपूर्ण मानव कल्याण के विभिन्न आयामों को अपने अंदर समेटेने का सार्थक प्रयास करती है। इसलिए कथा से पूर्व श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व को गहराई से समझने की जरूरत है। महेशपुर सबौर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन जगद्गुरु स्वामी श्री गोपालाचार्य जी महाराज ने समुपस्थित भक्त जनों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ही साक्षात् कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात् भागवत है। भागवत कथा हमारे लिए भक्ति का सबसे सरल एवं सुगम मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बार नारद जी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनका मन शांत नहीं हुआ। ऐसा सोचते-सोचते महर्षि नारद जी वृंदावन धाम की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए हैं, जो अचेत थे। युवती ने नारद मुनि से कहा कि महोदय मैं भक्ति हूं तथा यह दोनों मेरे पुत्र ज्ञान और वैराग्य हैं। हम वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे। लेकिन बृज में प्रवेश करते ही ये दोनों अचेत हो गए। आप कृपया करके इन्हें जगा दीजिए। इसके उपरांत देवर्षि नारद ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता का पाठ भी उन्हें सुना दिया। लेकिन वे नहीं जागे। इस कड़ी में नारद मुनि ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी तथा ज्ञान और वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। मुनियों के परामर्श पर देवर्षि नारद ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया। इससे ज्ञान और वैराग्य कथा के प्रथम दिवस की ही कथा श्रवण कर सचेत हो गए, जग गए। उन्होंने कहा कि गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है, लेकिन जो दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वह मनुष्य तो साक्षात् महात्मा होता है। इसलिए जिसके जीवन में श्रीमद्भागवत की एक बूंद भी पड़ी तो उसके हृदय में आनंद ही आनंद का वास होता है। दरअसल श्रीकृष्ण को आत्मसात करने से ही मानव का सर्वांगीण विकास हो सकता है, भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमें भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं है, वह तो हम सबके हृदय में मौजूद हैं। अतः जरूरत है उन्हें महसूस करने की। ऐसे में जितना संभव हो सके, श्रीकृष्ण के आचरण को हम अपने जीवन में उतार कर अपने जीवन को सार्थक करें और यही हमारा ध्येय भी होना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा में आज दूसरे दिन बड़ी संख्या में भक्त जन कथा सुनने पहुंचे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *