जीवंत हो रही रासलीला की पारंपरिक संस्कृति

गांव के बुद्धिजीवी बार बालाओं के अश्लील व फूहड़ गीतों के जगह रासलीला को देते है महत्व

परंपरा को प्रोत्साहित करने के लिए क्षेत्र के आईएएस , आईपीएस , चिकित्सक व प्रबुद्ध लोग करते है आर्थिक सहयोग

नालंदा ज़िले के रहुई ब्लॉक अंतर्गत अब्दुल्लीचक गांव में पारंपरिक संस्कृति हो रही जीवंत

एक तरफ जहां शहर व ग्रामीण इलाको में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर बार बालाओं द्वारा अश्लील व फूहड़ गीत – नृत्य का प्रचलन चरम पर है वही नालंदा जिले के रहुई स्थित अब्दुल्लीचक में पारंपरिक भक्ति व सांस्कृतिक कार्यक्रम रासलीला का आयोजन कर पारंपरिक संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा व जीवंत करने के लिए इसमें आने वाले खर्च को गांव के आईएएस , आइपीएस , चिकित्सक व प्रबुद्ध ग्रामीण उठाते है। इस तरह के आयोजन की शुरुआत कर पौराणिक परंपरा को एक बार फिर से जीवंत करने की शुरुआत की जा रही है जिसको आस – पास के लोगो द्वारा खूब सराहा जा रहा है।
रासलीला के लिए इस बार वृंदावन से बुलाई गई टीम द्वारा पंद्रह दिनों तक रासलीला का मंचन किया जा रहा है. जिससे आस – पास का माहौल भक्तिमय हो गया है.। इस रासलीला को देखने आ रहे लोगों का मानना है कि वर्तमान भागदौड़ वाले समय में थोड़ा समय भक्ति भाव के लिए भी निकलना चाहिए ताकि मानसिक शांति मिल सके।
साथ ही इस प्राचीन परंपरा को सहेजने का मौका भी मिल सके।

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